मन की पाती
Tuesday, 22 July 2014
Tuesday, 1 April 2014
Tuesday, 10 January 2012
फैसला ये तुम करो
चांद का इक सौदा हम करें, इक तुम करो ,
क्या मंज़ूर है उसे ,फैसला ये तुम करो ||
चांदनी का शामियाना ,या वो जाजम सी बिछे ,
या चिलमन सी वो सरके ,फैसला ये तुम करो ||
ख्वाब उसके हम बने या ,वो रहे हर ख्वाब में ,
बन सके वो इक नज़ारा ,फैसला ये तुम करो ||
इक इशारा हो तुम्हारा ,इक ज़रा सा हम करें ,
चांद किसके अंगना उतरे ,फैसला ये तुम करो ||
आसमां की ओढनी पर हो सितारे बेशुमार ,
या इक बिंदी सा वो चमके ,फैसला ये तुम करो ||
कंदील की मानिंद हो छत पर, या रहे महताब सा ,
या बना लें उसे सिरहाना ,फैसला ये तुम करो ||
ताज की बुर्ज हो या इक दरीचा टूटा सा ,
चांद पूरा हो या आधा ,फैसला ये तुम करो ||
जो हुआ ना कभी हमारा ,उस पे झगडे रात
तेरा है या है वो मेरा ,फैसला ये तुम करो ||
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