Tuesday, 10 January 2012

फैसला ये तुम करो


चांद का इक सौदा हम करें, इक तुम करो ,
क्या मंज़ूर है उसे ,फैसला ये तुम करो ||

चांदनी का शामियाना ,या वो जाजम सी बिछे ,
या चिलमन सी वो सरके ,फैसला ये तुम करो ||

ख्वाब उसके हम बने या ,वो रहे हर ख्वाब में ,
बन सके वो इक नज़ारा ,फैसला ये तुम करो ||

इक इशारा हो तुम्हारा ,इक ज़रा सा हम करें ,
चांद किसके अंगना उतरे ,फैसला ये तुम करो ||

आसमां की ओढनी पर हो सितारे बेशुमार ,
या इक बिंदी सा वो चमके ,फैसला ये तुम करो ||

कंदील की मानिंद हो छत पर, या रहे महताब सा ,
या बना लें उसे सिरहाना ,फैसला ये तुम करो ||

ताज की बुर्ज हो या इक दरीचा टूटा सा ,
चांद पूरा हो या आधा ,फैसला ये तुम करो ||

जो हुआ ना कभी हमारा ,उस पे झगडे रात
तेरा है या है वो मेरा ,फैसला ये तुम करो ||